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ईरान में भारतीय छात्रों की शिक्षा पर युद्ध का प्रभाव

ईरान में चल रहे युद्ध ने वहां पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों को संकट में डाल दिया है। इस लेख में हम जानेंगे कि क्यों भारतीय छात्र ईरान में चिकित्सा और धार्मिक अध्ययन के लिए जाते हैं, और कैसे युद्ध उनके करियर को प्रभावित कर सकता है। ईरान में अध्ययन की सुविधाएं और भारत में MBBS सीटों की कमी के कारण छात्रों का ईरान की ओर रुख करना भी चर्चा का विषय है।
 

ईरान–अमेरिका–इज़राइल युद्ध


हाल ही में इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान ने वहां पढ़ाई कर रहे हजारों भारतीय छात्रों को संकट में डाल दिया है। यह सवाल उठता है कि भारतीय छात्र ईरान में पढ़ाई क्यों कर रहे हैं, जबकि यह देश अमेरिका और यूरोप द्वारा कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।


भारतीय छात्रों का ईरान में अध्ययन

पिछले 10-15 वर्षों में, कई भारतीय छात्र विशेष रूप से चिकित्सा अध्ययन (MBBS/MD) के लिए ईरान जाने लगे हैं। इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। ईरान केवल एक विदेशी आकर्षण नहीं है; भारत में चिकित्सा अध्ययन की कठिनाइयों और ईरान में उपलब्ध सुविधाओं ने इस आकर्षण को बढ़ाया है।


धार्मिक अध्ययन के लिए भी ईरान

कुछ भारतीय छात्र, विशेष रूप से शिया समुदाय से, धार्मिक अध्ययन के लिए भी ईरान जाते हैं। ये छात्र क़ोम और मशहद जैसे शहरों में जाते हैं। क़ोम, जो तेहरान से 150 किमी दूर है, शिया धार्मिक शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र है।


भारत में MBBS सीटों की कमी

भारत में लाखों छात्र डॉक्टर बनने की ख्वाहिश रखते हैं, लेकिन सीटें सीमित हैं। हर साल 20-22 लाख छात्र NEET (UG) परीक्षा देते हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS सीटों की लागत 55-60 हजार रुपये है।


महंगे निजी कॉलेज

भारत में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस काफी कम है, लेकिन प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक है। दूसरी ओर, निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस इतनी अधिक है कि मध्यम वर्गीय परिवार इसे वहन नहीं कर सकते।


ईरान के मेडिकल विश्वविद्यालय

ईरान के कई विश्वविद्यालय डॉक्टर ऑफ मेडिसिन की डिग्री प्रदान करते हैं, जिसे भारत में MBBS के समकक्ष माना जाता है। वार्षिक फीस लगभग 6 लाख रुपये हो सकती है। छह वर्षों की चिकित्सा शिक्षा की कुल लागत लगभग 15-30 लाख रुपये है, जो भारत के अधिकांश मेडिकल कॉलेजों की तुलना में काफी कम है।


ईरान में चिकित्सा अध्ययन की सुविधाएं

ईरान के कई सरकारी मेडिकल विश्वविद्यालय 100 साल से अधिक पुराने हैं। इनके अस्पताल बड़े शिक्षण अस्पताल हैं, जो भारतीय छात्रों के लिए फायदेमंद हैं। भारतीय राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और WHO ईरानी मेडिकल विश्वविद्यालयों को मान्यता देते हैं।


आसान चिकित्सा प्रवेश

भारत में MBBS में प्रवेश के लिए बहुत उच्च NEET UG स्कोर की आवश्यकता होती है। जबकि ईरान में, NEET UG पास करना ही पर्याप्त है। कुछ विश्वविद्यालय अपनी प्रवेश परीक्षाएं भी आयोजित करते हैं। ईरान में प्रवेश के लिए कोई दान/कैपिटेशन शुल्क नहीं है।


अंग्रेजी में अध्ययन और कम जीवन व्यय

ईरान में चिकित्सा शिक्षा पहले एक या दो वर्षों के लिए अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई जाती है। बाद में, कुछ फारसी सीखनी होती है। वहां हॉस्टल और भोजन की लागत 10,000-12,000 रुपये प्रति माह है, जो कई भारतीय शहरों की तुलना में बहुत कम है।


युद्ध का करियर पर प्रभाव

यदि किसी देश में सैन्य तनाव या युद्ध होता है, तो छात्रों को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
1. विश्वविद्यालय बंद हो जाते हैं
2. अस्पताल में प्रशिक्षण बाधित होता है
3. वीजा और उड़ानें रद्द हो जाती हैं
4. डिग्रियां अधूरी रह जाती हैं