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सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: बीसीआई का छात्रों पर नियंत्रण नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को कानून के छात्रों के आचरण पर नियंत्रण करने का अधिकार नहीं है। यह फैसला नालसार यूनिवर्सिटी के छात्रों से जुड़े विवाद के संदर्भ में आया, जहां छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश की भागीदारी पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने बीसीआई द्वारा जारी नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया और छात्रों के अधिकारों की रक्षा की। इस फैसले पर सोशल मीडिया पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आई हैं, जिसमें इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत बताया गया है।
 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला


हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को कानून के छात्रों के आचरण पर नियंत्रण करने का कोई अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार केवल संबंधित शैक्षणिक संस्थान के पास है।


यह निर्णय हैदराबाद की नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों से जुड़े एक विवाद के संदर्भ में आया। छात्रों ने विश्वविद्यालय के 2026 के दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की भागीदारी पर आपत्ति जताई थी। इस विवाद के दौरान बीसीआई ने कुछ नोटिफिकेशन जारी किए थे।


— News Media (@NewsMedia) September 3, 2026



सुप्रीम कोर्ट की बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना शामिल थे। अदालत ने बीसीआई द्वारा जारी किए गए दो नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया, जो कुछ घंटों के भीतर आलोचना के बाद वापस ले लिए गए थे। कोर्ट ने अपने पहले के आदेश को भी स्थायी बना दिया, जिसमें बीसीआई और राज्य बार काउंसिलों को छात्रों या फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से रोका गया था।


अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लॉ कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्र बीसीआई के नियामक ढांचे के अंतर्गत नहीं आते हैं, जिसका अर्थ है कि बीसीआई कानून के छात्रों पर नियंत्रण नहीं रख सकता।


इस फैसले पर सोशल मीडिया पर कई प्रतिक्रियाएं आईं। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे लोकतंत्र और छात्र अधिकारों की जीत बताया। एक उपयोगकर्ता ने लिखा कि बीसीआई ने केवल एक पत्र लिखने के कारण पूरे बैच को निशाना बनाने की कोशिश की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि छात्रों पर उसका कोई अधिकार नहीं है।


The Supreme Court’s ruling that the BCI does not have the power to regulate the conduct of law students in the recent NALSAR row is so refreshing. A win for NALSAR students and their freedom of speech, is a win for students and democracy everywhere.

— Ms Sanctimonious (@mssanctimonious) September 3, 2026



एक अन्य उपयोगकर्ता ने इसे जवाबदेही की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी संस्था छात्रों के खिलाफ अपनी शक्ति का दुरुपयोग नहीं कर सकती। कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत करार दिया। एक पोस्ट में लिखा गया कि नालसार छात्रों की अभिव्यक्ति की आजादी की जीत वास्तव में छात्रों और लोकतंत्र दोनों की जीत है।