×

सीबीएसई कक्षा 12 के परिणामों में गिरावट: नई मूल्यांकन प्रणाली का प्रभाव

सीबीएसई की कक्षा 12 के परिणामों में इस वर्ष गिरावट आई है, जो नई दक्षता-आधारित मूल्यांकन प्रणाली का परिणाम है। स्कूलों के प्राचार्यों का मानना है कि यह प्रणाली छात्रों की अवधारणात्मक समझ पर प्रभाव डाल रही है। केंद्रीय विद्यालयों का उत्तीर्ण प्रतिशत सबसे अधिक 98.55 प्रतिशत रहा, जबकि अन्य स्कूलों में गिरावट देखी गई है। जानें इस बदलाव के पीछे के कारण और छात्रों के प्रदर्शन पर इसके प्रभाव के बारे में।
 

सीबीएसई कक्षा 12 के परिणामों में कमी

 सीबीएसई द्वारा इस वर्ष कक्षा 12 के परिणामों में उत्तीर्ण प्रतिशत में कमी आई है, जो दक्षता-आधारित मूल्यांकन और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) जैसी नई प्रणालियों पर जोर देने का संकेत है। स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षाविदों ने इस पर अपनी राय व्यक्त की है। सीबीएसई ने बुधवार को कक्षा 12 के परीक्षा परिणाम जारी किए, जिसमें 85 प्रतिशत से अधिक छात्रों ने सफलता प्राप्त की है। हालांकि, यह पिछले वर्ष की तुलना में तीन प्रतिशत कम है। पहली बार, सीबीएसई ने कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ओएसएम प्रणाली के माध्यम से किया।


इस वर्ष केंद्रीय विद्यालयों का उत्तीर्ण प्रतिशत सबसे अधिक 98.55 प्रतिशत रहा। दिल्ली में केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के पूर्व प्राचार्य सुधाकर प्रसाद ठाकुर ने इस सफलता का श्रेय संगठन की समन्वित शैक्षणिक प्रणाली को दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सीखने संबंधी कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करना भी प्रभावी रहा। ठाकुर ने कहा, 'केवीएस का दृष्टिकोण बेहद व्यवस्थित है। शिक्षक और प्राचार्य प्रत्येक छात्र पर ध्यान देते हैं और उनकी सीखने संबंधी कमियों की पहचान करते हैं। इससे विद्यार्थियों में कौशल और दक्षताएं विकसित होती हैं।'


कक्षा 12 के उत्तीर्ण प्रतिशत में गिरावट पर ठाकुर ने कहा कि दक्षता-आधारित और अवधारणात्मक प्रश्नों पर जोर देने का असर उन छात्रों पर पड़ा होगा जिनकी अवधारणात्मक समझ कमजोर थी। उन्होंने कहा, 'अब प्रश्न केवल सैद्धांतिक नहीं रह गए हैं। छात्रों को प्रश्न को समझना और समस्या-समाधान आधारित दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है।' माउंट आबू स्कूल की प्राचार्य ज्योति अरोड़ा ने कहा कि बोर्ड अब रटने की प्रवृत्ति से हटकर अवधारणात्मक समझ और अनुप्रयोग आधारित मूल्यांकन की ओर बढ़ रहा है।


उन्होंने कहा, 'कई छात्रों ने विभिन्न विषयों में 100 में 100 अंक प्राप्त किए हैं। यह मामूली गिरावट कई कारणों का परिणाम हो सकती है, जिनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सिफारिशों के अनुरूप सीबीएसई द्वारा लागू की गई दक्षता-आधारित मूल्यांकन प्रणाली भी शामिल है।' अरोड़ा ने कहा कि मूल्यांकन पैटर्न में थोड़ा बदलाव हुआ है जो अधिक दक्षता और अनुप्रयोग आधारित था। भौतिकी और गणित के परिणाम निराशाजनक रहे हैं। ओएसएम प्रणाली पर उन्होंने कहा कि इससे परीक्षकों को स्पष्ट मूल्यांकन दिशा-निर्देश मिले।


उन्होंने कहा, 'ओएसएम आधारित जांच प्रणाली सुव्यवस्थित थी। इसके अलावा, सीबीएसई का झुकाव दक्षता और अनुप्रयोग आधारित मूल्यांकन की ओर रहा।' हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष का प्रश्नपत्र पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत आसान था। 'कंपार्टमेंट' के मामलों में वृद्धि पर उन्होंने कहा कि गणित और भौतिकी के परिणाम कमजोर रहने से इसका असर पड़ा है, जबकि पेंटिंग और व्यावसायिक कला जैसे कौशल आधारित विषयों में कई छात्रों ने पूर्ण अंक हासिल किए।


द इंडियन स्कूल की प्राचार्य तानिया जोशी ने कहा कि उनके स्कूल का प्रदर्शन अच्छा रहा और कई विषयों में औसत अंक बढ़े हैं। उन्होंने कहा, 'ऑनलाइन मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक मानकीकृत और वैज्ञानिक रही। इसमें अतिरिक्त अंक देने की गुंजाइश नहीं थी।' हालांकि, उन्होंने भी माना कि भौतिकी और गणित में अंकों में गिरावट आई है, जबकि रसायन विज्ञान, इतिहास और राजनीति विज्ञान जैसे विषयों में सुधार हुआ है। पुनर्मूल्यांकन की मांग पर जोशी ने कहा कि कई छात्र प्रक्रिया को लेकर स्कूल से मार्गदर्शन मांग रहे हैं।


उन्होंने कहा, 'हर साल ऐसा होता है, लेकिन इस बार गणित और भौतिकी के परिणामों में गिरावट देखने को मिली है।' उन्होंने इस सुझाव को खारिज किया कि मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक कठोर थी। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया बेहद व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से की गई। लड़कियों के एक बार फिर लड़कों से बेहतर प्रदर्शन करने पर जोशी ने कहा कि उनके स्कूल में भी यही रुझान देखने को मिला। स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा कि मूल्यांकन योजना में बदलाव का असर स्वाभाविक रूप से परिणामों में दिखाई दिया है। उन्होंने कहा, 'इस बार अंकों के प्रतिशत में कुछ अंतर है, लेकिन यह स्वाभाविक है क्योंकि इस बार मूल्यांकन योजना बदली गई थी।'