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संजय परमार की प्रेरणादायक यात्रा: सरकारी नौकरी से खाकी तक का सफर

संजय परमार की कहानी एक प्रेरणा है, जो सरकारी नौकरी के बाद भी अपने खाकी पहनने के सपने को पूरा करने के लिए संघर्ष करते रहे। शाजापुर के केवड़ाखेड़ी गांव के निवासी संजय ने पटवारी की नौकरी की, लेकिन उनका सपना पुलिस सेवा में जाने का था। उन्होंने कई बार प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें MP पुलिस SI भर्ती परीक्षा में प्रदेश में पहला स्थान दिलाया। जानें संजय की प्रेरणादायक यात्रा के बारे में।
 

प्रेरणादायक यात्रा:


शाजापुर के केवड़ाखेड़ी गांव के निवासी संजय परमार के लिए सरकारी नौकरी केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। किसान परिवार से आने वाले संजय ने पटवारी की नौकरी की, लेकिन उनके मन में हमेशा से खाकी पहनने का सपना था। उनके बड़े भाई की सेना में सेवा ने इस वर्दी के प्रति उनके आकर्षण को और बढ़ा दिया। जब उन्होंने पटवारी के रूप में कानून-व्यवस्था को संभालते पुलिसकर्मियों को देखा, तो उनका सपना और भी मजबूत हो गया। इसके बाद, उन्होंने नौकरी के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी।


पटवारी बने, लेकिन खाकी का सपना नहीं छोड़ा

संजय वर्तमान में पटवारी के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी मिलने के बाद, कई लोगों ने उन्हें सलाह दी कि अब सरकारी नौकरी मिल गई है, इसलिए आगे पढ़ाई की कोई आवश्यकता नहीं है। लेकिन संजय का लक्ष्य इससे कहीं अधिक था। वह पटवारी की जिम्मेदारियों के साथ-साथ पुलिस सेवा में जाने का सपना देख रहे थे। उनके बड़े भाई की सेना में सेवा ने उन्हें वर्दी के प्रति आकर्षित किया, और नौकरी के दौरान पुलिस की भूमिका को करीब से देखने से उनका लक्ष्य और स्पष्ट हो गया।


तीन बार MPPSC इंटरव्यू, फिर भी नहीं मिली मंजिल

संजय की सफलता के पीछे कई असफल प्रयास छिपे हुए हैं। JEE एडवांस्ड में असफलता के बाद, उन्होंने MPPSC की तैयारी शुरू की और तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन हर बार अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना सके। लगातार असफलताओं के बावजूद, उन्होंने अपनी तैयारी को जारी रखा और SI भर्ती परीक्षा की तैयारी को नए तरीके से आगे बढ़ाया।


ड्यूटी के बाद शुरू होती थी पढ़ाई की दूसरी पारी

पटवारी की नौकरी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी एक साथ करना आसान नहीं था। संजय ने अपनी ड्यूटी को व्यवस्थित किया और रोजाना चार से पांच घंटे पढ़ाई के लिए निकाले। सुबह ड्यूटी से पहले और रात में काम खत्म होने के बाद, वह किताबों के साथ समय बिताते थे। उन्होंने सोशल मीडिया, बेवजह की बातचीत और घूमने-फिरने से दूरी बना ली।


595.98 अंक के साथ मेरिट में सबसे ऊपर नाम

जब MP पुलिस SI और सूबेदार भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम आया, तो संजय की मेहनत रंग लाई। उन्होंने 595.98 अंक प्राप्त किए और प्रदेश की मेरिट में पहला स्थान हासिल किया। इस भर्ती में कुल 500 पद थे, जिनके लिए चयन प्रक्रिया पूरी की गई। लिखित परीक्षा के बाद 5,113 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए पात्र हुए। इसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर अंतिम मेरिट तैयार की गई। अंतिम परिणाम में 436 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जबकि 64 पद खाली रह गए।