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लीजा गर्ग की प्रेरणादायक यात्रा: संघर्ष से सफलता तक

लीजा गर्ग की प्रेरणादायक यात्रा ने साबित किया है कि संघर्ष और दृढ़ता से सफलता प्राप्त की जा सकती है। ग्रेजुएशन के बाद पांच साल तक बेरोजगारी का सामना करने के बावजूद, लीजा ने यूपीएससी में 303वीं रैंक हासिल की। जानें कैसे उन्होंने अपने सपनों को साकार किया और परिवार की चिंताओं को गर्व में बदला।
 

लीजा गर्ग की प्रेरणादायक यात्रा


जब बार-बार प्रयास करने के बावजूद सफलता नहीं मिलती, तो व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर पड़ने लगता है। लीजा गर्ग की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। ग्रेजुएशन के बाद उन्हें कई वर्षों तक नौकरी नहीं मिली और सरकारी परीक्षाओं में निरंतर असफलताओं ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर दिया। लेकिन उन्होंने अपने सपनों को छोड़ने के बजाय संघर्ष जारी रखने का निर्णय लिया।


पांच साल की बेरोजगारी ने तोड़ा हौसला

लीजा ने ग्रेजुएशन के बाद लगभग पांच साल तक बेरोजगारी का सामना किया। इस दौरान उन्होंने कई सरकारी परीक्षाएं दीं, लेकिन बार-बार असफलता का सामना करना पड़ा। यूपीएससी के 2023 और 2024 के प्रारंभिक प्रयासों में भी उन्हें सफलता नहीं मिली। लगातार असफलताओं ने उनके आत्मविश्वास को प्रभावित किया और करियर को लेकर चिंता बढ़ा दी।


मां के आंसू और पिता की चिंता

लीजा के संघर्ष में उनके परिवार की भावनाएं भी महत्वपूर्ण रहीं। उनकी मां एक प्रोफेसर हैं, जबकि पिता अपनी बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित रहते थे। मां की आंखों में आंसू देखकर लीजा को दुख होता था, क्योंकि उन्हें लगता था कि उनकी असफलताओं के कारण परिवार भी परेशान है।


रिश्तेदारों के तानों का सामना

यूपीएससी की तैयारी के दौरान लीजा को न केवल पढ़ाई की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, बल्कि सामाजिक दबाव भी झेलना पड़ा। रिश्तेदारों से यह सुनना कि प्रोफेसर की बेटी होकर भी वह कुछ नहीं कर पाईं, उनके लिए बेहद कठिन था।


मंदिर में मांगी हिम्मत

जब संघर्ष के बीच लीजा की हिम्मत जवाब देने लगी, तब उन्होंने मंदिर जाकर शक्ति मांगी। उनके अनुसार, उन्होंने वहां सफलता की नहीं, बल्कि कठिनाइयों से लड़ने की ताकत मांगी। यह पल उनके लिए एक नई शुरुआत साबित हुआ। नवंबर 2025 में उन्होंने नई रणनीति के साथ अपनी तैयारी शुरू की।


छह साल की मेहनत के बाद मिली 303वीं रैंक

लीजा की मेहनत आखिरकार रंग लाई और उन्होंने यूपीएससी 2025 में ऑल इंडिया रैंक 303 हासिल की। परिणाम में अपना नाम देखकर उन्हें वर्षों की निराशा और संघर्ष के बाद बड़ी राहत मिली। उनकी सफलता ने परिवार की चिंताओं को गर्व में बदल दिया। अब लीजा भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की अधिकारी बन चुकी हैं।