भारत में बेरोजगारी दर में वृद्धि: मई में 5.5 प्रतिशत तक पहुंची
बेरोजगारी की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में 5.2 प्रतिशत की दर से शुरू होकर, मई में बेरोजगारी दर 5.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह पिछले 11 महीनों में सबसे ऊंचा स्तर है। जबकि शहरी क्षेत्रों में थोड़ी सुधार देखने को मिली है, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ती जा रही है। गांवों में लोग काम पाने में असमर्थ हैं, जिससे नौकरी बाजार में संकट उत्पन्न हो रहा है।
ग्रामीण बेरोजगारी में वृद्धि
ग्रामीण बेरोजगारी दर अप्रैल में 4.6 प्रतिशत से बढ़कर मई में 5.1 प्रतिशत हो गई है। इसके विपरीत, शहरी बेरोजगारी दर में गिरावट आई है; यह 6.6 प्रतिशत से घटकर 6.4 प्रतिशत हो गई है। यह शहरी क्षेत्रों में बेहतर नौकरी के अवसरों को दर्शाता है। यह लगातार चौथा महीना है जब बेरोजगारी बढ़ी है, और यह 11 महीनों में सबसे ऊंचा स्तर है।
कार्यबल में कमी
बेरोजगारी के साथ-साथ कार्यबल की भागीदारी दर भी गिरी है। मई में यह दर 55 प्रतिशत से घटकर 54.4 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह, कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात (WPR) 52.2 प्रतिशत से घटकर 51.4 प्रतिशत हो गया है। इसका मतलब है कि नौकरी सृजन की गति श्रम बाजार में लोगों की बढ़ती संख्या के मुकाबले धीमी हो रही है।
महिलाओं और युवाओं के लिए चुनौतियाँ
हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं। वहीं, युवाओं के बीच बेरोजगारी की चिंता बनी हुई है। यह समस्या केवल पुरुषों और महिलाओं तक सीमित नहीं है; बेरोजगारी दर एक राष्ट्र की आर्थिक सेहत के लिए खतरा बन रही है। बढ़ती हुई रोजगार दर लोगों की आय को बढ़ाती है, जिससे उपभोग और आर्थिक गतिविधि में वृद्धि होती है। इसके विपरीत, बेरोजगारी में वृद्धि उपभोक्ता खर्च को प्रभावित कर सकती है और आर्थिक विकास की गति को धीमा कर सकती है।