भारत में नीली और ग्रे-कॉलर नौकरियों में कौशल की प्राथमिकता
भारत में नीली और ग्रे-कॉलर भर्ती में बदलाव
भारत में नीली और ग्रे-कॉलर नौकरियों की भर्ती में एक महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है। नियोक्ता अब औपचारिक शिक्षा या डिग्री के बजाय व्यावहारिक कौशल, कार्य तत्परता और नौकरी के अनुभव को प्राथमिकता दे रहे हैं। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रमुख क्षेत्रों में बिना किसी औपचारिक शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जा रही है। रिपोर्ट, "भारतीय नीली-कॉलर भर्ती में कौशल की बढ़ती प्राथमिकता," जो कि WorkIndia द्वारा प्रकाशित की गई है, यह दर्शाती है कि "10वीं कक्षा से कम" शिक्षा अब नौकरी के विज्ञापनों में सबसे पसंदीदा योग्यता बन गई है। यह पारंपरिक शिक्षा-आधारित मानदंडों से कौशल-आधारित भर्ती की ओर एक बदलाव को दर्शाता है.
श्रम बाजार में बदलाव
भारत का श्रम बाजार एक महत्वपूर्ण परिवर्तन से गुजर रहा है। WorkIndia के सह-संस्थापक और CEO निलेश डुंगरवाल के अनुसार, नियोक्ता अब औपचारिक डिग्रियों के बजाय कौशल, विश्वसनीयता और नौकरी के लिए तत्परता को प्राथमिकता दे रहे हैं। डुंगरवाल ने इस बदलाव को समझाते हुए कहा, "यह परिवर्तन नीली-कॉलर भर्ती को अधिक समावेशी बना रहा है, जिससे उन लाखों भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा हो रहे हैं जिनके पास औपचारिक शिक्षा नहीं है लेकिन जिनके पास आवश्यक कौशल हैं।"
मेट्रो और छोटे शहरों की भूमिका
भर्ती डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि नीली-कॉलर नौकरी निर्माण अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। जबकि दिल्ली वर्तमान में 26 प्रतिशत नौकरी के विज्ञापनों के साथ अग्रणी है, मांग तेजी से Tier-II और Tier-III शहरों की ओर बढ़ रही है। यह विकेंद्रीकरण इस बात का प्रमाण है कि नीली-कॉलर नौकरी के अवसर देश भर में श्रमिकों के लिए अधिक सुलभ हो रहे हैं, छोटे शहरों में भी स्थानीय अवसर उभर रहे हैं। यह रिपोर्ट 2025 में प्लेटफॉर्म पर 992,213 नियोक्ताओं और 10,176,783 कर्मचारियों के डेटा और इनपुट पर आधारित है।
रिपोर्ट विभिन्न क्षेत्रों में लिंग आधारित भर्ती पैटर्न पर महत्वपूर्ण डेटा भी साझा करती है:
1. डिलीवरी क्षेत्र: इस क्षेत्र में पुरुष उम्मीदवारों की सबसे अधिक प्राथमिकता है।
2. टेली कॉलिंग: टेली कॉलिंग क्षेत्र में महिला उम्मीदवारों की भर्ती में अग्रणी है।
3. संचालन कौशल अब उच्च मात्रा और फ्रंटलाइन क्षेत्रों में भर्ती का प्राथमिक आधार बन गए हैं।
2026 में रोजगार के मोर्चे पर क्या बदलाव आएंगे?
WorkIndia का अनुमान है कि जैसे-जैसे कंपनियां 2026 में अपने व्यवसाय का विस्तार करेंगी, उनका ध्यान गति, दक्षता और कार्यबल की लचीलापन पर होगा। भारत में नीली-कॉलर भर्ती का यह नया मॉडल न केवल पारंपरिक रोजगार मानदंडों को तोड़ रहा है बल्कि कुशल श्रमिकों के लिए नए रास्ते भी खोल रहा है। औपचारिक शिक्षा की बाधा को हटाने से देश की एक बड़ी आबादी को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में भाग लेने का मौका मिल रहा है।