बिहार चुनाव: टीएमबीयू से चार मुख्यमंत्री बने
बिहार चुनावों का माहौल और टीएमबीयू की भूमिका
बिहार चुनावों के दौरान, टिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) एक बार फिर चर्चा में है। यह विश्वविद्यालय राज्य को चार मुख्यमंत्री देने के लिए जाना जाता है। आइए जानते हैं वे चार नाम कौन हैं...
आज बिहार चुनावों के परिणाम घोषित होने वाले हैं। सुबह से राज्य में वोटों की गिनती चल रही है। एनडीए, महागठबंधन, जनसुराज और कई अन्य पार्टियां चुनावी मैदान में हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राज्य में एक ऐसा संस्थान है जिसने चार मुख्यमंत्री तैयार किए हैं? आइए जानते हैं कि यह कौन सा संस्थान है जो बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यदि आप इस संस्थान के बारे में जानने के इच्छुक हैं, तो यह टिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) है। यह केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है, बल्कि राजनीति का एक स्कूल है, जहां से कई नेताओं ने न केवल राज्य में बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई है।
एक ही विश्वविद्यालय से चार मुख्यमंत्री
टीएमबीयू का बिहार की राजनीति में योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यहां के छात्र भोला पासवान शास्त्री तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद, जगन्नाथ मिश्रा, जो टीएनबी कॉलेज के छात्र थे, ने भी राज्य की कमान संभाली। इस श्रृंखला में भागवत झा आजाद और चंद्रशेखर सिंह भी टीएमबीयू के छात्र रहे हैं। दोनों ने बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर कार्य किया।
मुख्यमंत्रियों की सूची
भोला पासवान शास्त्री
भोला पासवान शास्त्री ने तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उनका कार्यकाल फरवरी 1968 से जून 1968, फिर जून 1969 से जुलाई 1969, और अंत में जून 1971 से जनवरी 1972 तक रहा। हालांकि, उनके कार्यकाल छोटे थे।
जगन्नाथ मिश्रा
जगन्नाथ मिश्रा ने राज्य के 14वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने भी तीन बार मुख्यमंत्री का पद संभाला। डॉ. मिश्रा ने पहली बार 1975 में बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। उन्हें दूसरी बार 1980 में और अंतिम बार 1989 से 1990 तक मुख्यमंत्री बनाया गया।
भागवत झा आजाद
भागवत झा आजाद ने बिहार के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने 14 फरवरी 1988 से 10 मार्च 1989 तक कार्य किया।
चंद्रशेखर सिंह
चंद्रशेखर सिंह, जो इसी संस्थान से हैं, ने भी राज्य की कमान संभाली। उन्होंने 14 अगस्त 1983 से 12 मार्च 1985 तक बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।