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बिहार गुरु-शिष्य परंपरा योजना: सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने की पहल

बिहार सरकार ने गुरु-शिष्य परंपरा योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य युवाओं को सांस्कृतिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस योजना के तहत 20 चयनित गुरुओं को प्रति माह 15,000 रुपये और 160 शिष्यों को 3,000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। योजना के अंतर्गत एक समारोह का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें प्रशिक्षु अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। आवेदन करने के लिए योग्य उम्मीदवारों को विभागीय वेबसाइट पर जाना होगा।
 

बिहार गुरु-शिष्य परंपरा योजना का परिचय



बिहार गुरु-शिष्य परंपरा योजना: यह योजना कला, संस्कृति और युवा विभाग द्वारा शुरू की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को विशेषज्ञ गुरुओं के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और दुर्लभ पारंपरिक लोक एवं शास्त्रीय कलाओं को संरक्षित और बढ़ावा दिया जा सके। इस योजना के तहत आवेदन करना होगा, जिसमें 20 चयनित गुरुओं को प्रति माह 15,000 रुपये, एक सहायक को 7,500 रुपये, और 160 शिष्यों को 3,000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी।


समारोह का आयोजन

समारोह का आयोजन: इस योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा करने के बाद एक समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रशिक्षु अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे और उन्हें सम्मानित किया जाएगा। यह योजना राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।


योग्यता मानदंड

बिहार गुरु-शिष्य योजना के लिए कुछ योग्यता मानदंड हैं:



  • गुरु की आयु 50 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।

  • गुरु बिहार का निवासी होना चाहिए।

  • गुरु के पास संबंधित दुर्लभ ज्ञान में कम से कम 10 वर्षों का अनुभव होना चाहिए।

  • गुरु के पास प्रशिक्षण देने के लिए उचित निवास और स्थान होना चाहिए, साथ ही प्रशिक्षण केंद्र की सुविधा भी होनी चाहिए।


आवेदन कैसे करें?

आवेदन करने की प्रक्रिया:


योग्य उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए विभागीय वेबसाइट state.bihar.gov.in/yac/ पर जाना होगा। इसके बाद, सभी आवश्यक प्रमाण पत्रों के साथ आवेदन पत्र को डाउनलोड करके 31 अगस्त तक सांस्कृतिक मामलों के निदेशालय में स्पीड पोस्ट या हाथ से भेजना होगा।