डॉ. संजुक्ता पराशर को CRPF में पुलिस महानिरीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया
नई दिल्ली में महत्वपूर्ण नियुक्ति
नई दिल्ली: भारतीय पुलिस सेवा की 2006 बैच की अधिकारी डॉ. संजुक्ता पराशर को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में पुलिस महानिरीक्षक (IG) के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के आधार पर की गई है, जिसके संबंध में गृह मंत्रालय ने 6 अगस्त को आदेश जारी किए। संजुक्ता पराशर का नाम असम में उग्रवाद विरोधी अभियानों में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए विशेष रूप से चर्चा में रहा है। सोनितपुर में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य करते हुए, उन्होंने कई सफल अभियानों का नेतृत्व किया। कठिन परिस्थितियों में पुलिस बल के साथ काम करने और उग्रवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कारण उन्हें 'आयरन लेडी ऑफ असम' के नाम से भी जाना जाता है। अब CRPF में IG के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है।
शिक्षा में उत्कृष्टता
संजुक्ता पराशर का जन्म 3 अक्टूबर 1979 को असम में हुआ। उन्होंने 2005 में संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 85वीं रैंक प्राप्त की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गुवाहाटी के होली चाइल्ड स्कूल और आर्मी स्कूल, नारंगी में हुई। इसके बाद, उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वुमेन से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
इसके बाद, उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंध में एमए किया और फिर अमेरिकी विदेश नीति में एमफिल और पीएचडी की। शोध कार्य के दौरान उन्होंने इंडोनेशिया में भी काम किया, जिससे उनके अकादमिक क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार हुआ।
सोनितपुर में उग्रवाद विरोधी अभियान
2008 में माकुम में सहायक कमांडेंट के रूप में सेवा शुरू करने के बाद, संजुक्ता पराशर ने असम में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। सोनितपुर की पुलिस अधीक्षक रहते हुए, उन्होंने 15 महीनों में 16 उग्रवाद विरोधी मुठभेड़ों का नेतृत्व किया, जिसमें एनडीएफबी के 16 उग्रवादी मारे गए और 64 को गिरफ्तार किया गया।
उनके कार्यकाल के दौरान, 2013 में 172 और 2014 में 175 उग्रवादियों को जेल भेजा गया। उनकी कार्यशैली में यह विशेषता रही कि वे केवल कार्यालय से अभियानों की निगरानी नहीं करती थीं, बल्कि स्वयं अभियान स्थलों पर जाकर सक्रिय रूप से भाग लेती थीं।
उग्रवाद विरोधी अभियानों में अग्रणी
उग्रवाद विरोधी अभियानों के दौरान, संजुक्ता पराशर अग्रिम मोर्चे पर नेतृत्व के लिए जानी गईं। बुलेटप्रूफ जैकेट और AK-47 के साथ अभियान में शामिल होने वाली उनकी तस्वीरें और कार्यशैली चर्चा का विषय बनीं। उनका ध्यान ऐसे अभियानों पर था, जिनमें खुफिया जानकारी और तकनीकी निगरानी के आधार पर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने उग्रवादियों के नेटवर्क को कमजोर करने के लिए उनके मददगारों और वित्तीय तंत्र पर भी कार्रवाई को प्राथमिकता दी। उनके नेतृत्व में पुलिस की कार्रवाई केवल मुठभेड़ तक सीमित नहीं रही, बल्कि उग्रवाद के पीछे काम करने वाले पूरे नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में भी प्रयास किए गए।
कम्युनिटी पुलिसिंग पर जोर
संजुक्ता पराशर की कार्यशैली में स्थानीय समुदाय का विश्वास जीतना भी महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर, सामुदायिक बैठकें और राहत सामग्री वितरण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस और स्थानीय आबादी के बीच संपर्क को मजबूत किया।
उन्होंने भटके हुए युवाओं के परिवारों से संपर्क कर उन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने और मुख्यधारा में लौटने पर जोर दिया। स्थानीय महिलाओं और युवाओं को शिक्षा, खेल और सिविल सेवाओं में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
NIA में महत्वपूर्ण भूमिका
असम में सेवा के बाद, संजुक्ता पराशर ने 2017 से 2023 तक राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में एसपी और बाद में पुलिस उपमहानिरीक्षक के पद पर कार्य किया। इस दौरान, उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े कई जटिल आतंकवाद विरोधी मामलों की जांच की। जनवरी 2024 में उन्हें पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया।
उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक, 2022 में पुलिस प्रशिक्षण में योगदान के लिए केंद्रीय गृह मंत्री उत्कृष्ट सेवा पदक और महिला सशक्तिकरण के लिए रानी गाइदिनल्यू जेलियांग पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
CRPF में नई जिम्मेदारी
CRPF में IG के रूप में संजुक्ता पराशर की नई नियुक्ति उनके लंबे पुलिस करियर में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल देश के आंतरिक सुरक्षा तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। असम के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में अग्रिम मोर्चे पर काम करने से लेकर NIA में जटिल मामलों की जांच तक का उनका अनुभव अब CRPF की नई भूमिका में उपयोगी हो सकता है। उनकी नियुक्ति ने एक बार फिर उनके साहसिक पुलिस करियर और नेतृत्व क्षमता को चर्चा में ला दिया है।