टीहरी गढ़वाल में UKSSSC परीक्षा पेपर लीक मामले में असिस्टेंट प्रोफेसर की गिरफ्तारी
टीहरी गढ़वाल में पेपर लीक की जांच में नया मोड़
टीहरी गढ़वाल: UKSSSC ग्रेजुएट लेवल भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है। सीबीआई ने टीहरी गढ़वाल के सरकारी कॉलेज में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन चौहान को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने परीक्षा के दौरान वास्तविक समय में प्रश्नों को हल कर एक उम्मीदवार को भेजा। सीबीआई ने इसे पेपर लीक गैंग के नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब परीक्षा के तीन पृष्ठों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गईं। यह परीक्षा 21 सितंबर 2025 को आयोजित की गई थी, जिसमें पटवारी, लेखपाल और अन्य प्रशासनिक पदों के लिए एक लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे।
जांच में क्या तथ्य सामने आए?
एफआईआर और जांच में यह सामने आया कि उम्मीदवार मोहम्मद खालिद शहजाद ने हरिद्वार परीक्षा केंद्र के अंदर से प्रश्नपत्र की तस्वीरें खींचीं और उन्हें अपनी बहनों सबीहा और हिना को भेजा। दोनों बहनों ने ये तस्वीरें प्रोफेसर सुमन चौहान तक पहुंचाईं। आरोप है कि चौहान ने उसी समय सवाल हल किए और जवाब वापस खालिद को भेज दिए। यह सब एक सुनियोजित तरीके से किया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई आकस्मिक गलती नहीं थी, बल्कि एक संगठित साजिश थी।
UKSSSC ने क्या कदम उठाए?
आरोपियों के खिलाफ भर्ती परीक्षा में धांधली और अनुचित साधनों के उपयोग से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। लीक के बाद, UKSSSC ने तुरंत परीक्षा रद्द कर दी और घोषणा की कि तीन महीने के भीतर 416 रिक्त पदों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस घटना ने पूरे प्रदेश में आक्रोश पैदा कर दिया, और अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
सीबीआई जांच में क्या जानकारी मिली?
जनता और युवाओं के दबाव के चलते अक्टूबर 2025 के अंत में यह मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की और 28 नवंबर 2025 को सुमन चौहान की गिरफ्तारी को एक बड़ी सफलता बताया है। सरकार ने इस मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त जस्टिस यू सी ध्यानी की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था, जिसने अंतरिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है।
सीबीआई ने आगे की संभावनाओं के संकेत दिए
सीबीआई ने संकेत दिया है कि इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि पूरे नेटवर्क को ट्रेस करने का कार्य जारी है। कई रिपोर्टों के अनुसार, 2010 से अब तक देश में 60 से अधिक बड़े पेपर लीक मामले सामने आ चुके हैं, जिन्होंने लाखों युवाओं को प्रभावित किया है।