×

छटनी के दौरान किन कर्मचारियों को सबसे पहले किया जाता है प्रभावित?

बाजार में अनिश्चितता और लागत कम करने के दबाव के चलते कई कंपनियां छटनी का सहारा ले रही हैं। जानें कि किन कर्मचारियों को सबसे पहले प्रभावित किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ओवरस्टाफिंग, प्रदर्शन में गिरावट, पुरानी स्किल्स और नई रणनीतियों का प्रभाव ऐसे प्रमुख कारक हैं जो छटनी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस लेख में हम इन सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे।
 

बाजार की अनिश्चितता और छटनी का दबाव


नई दिल्ली: हाल के महीनों में बाजार में अनिश्चितता और लागत में कटौती के दबाव ने कई बड़ी कंपनियों को छटनी का सहारा लेने पर मजबूर कर दिया है। विभिन्न क्षेत्रों में पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही है, जिससे कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ गई है। यह समझना अक्सर कठिन होता है कि कंपनी के भीतर किन कर्मचारियों पर सबसे पहले असर पड़ता है।


विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ संकेत होते हैं जो यह दर्शाते हैं कि कौन-सी भूमिकाएं और कर्मचारी छटनी के दौरान पहले रडार पर आते हैं।


टीम में ओवरस्टाफिंग का प्रभाव

जब किसी टीम या विभाग में कर्मचारियों की संख्या जरूरत से अधिक होती है, तो कंपनी सबसे पहले वहां कटौती करती है। कभी-कभी प्रोजेक्ट में बदलाव या बड़े सौदों के खत्म होने पर भी स्टाफिंग की जरूरतें घट जाती हैं। ऐसे में वे कर्मचारी पहले प्रभावित होते हैं जिनकी भूमिकाएं तुरंत दूसरी टीम में नहीं जा सकतीं। कंपनियां ऐसे मामलों में लचीले और मल्टी-स्किल वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता देती हैं।


परफॉर्मेंस का महत्व

छटनी के समय परफॉर्मेंस एक महत्वपूर्ण कारक होता है। जिन कर्मचारियों का वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन कमजोर होता है या जिन पर लगातार सुधार की टिप्पणी आती है, वे सबसे पहले सूची में आते हैं। कंपनियां ऐसे कर्मचारियों पर निवेश कम करने का निर्णय लेती हैं।


पुरानी स्किल्स का जोखिम

कंपनियों को अब उन कर्मचारियों की आवश्यकता है जिनके कौशल अद्यतन हैं। जो कर्मचारी लंबे समय से अपनी स्किल्स को अपडेट नहीं करते, वे छटनी की संभावित सूची में पहले आते हैं। नई तकनीकों को अपनाने में धीमे लोग अधिक जोखिम में रहते हैं।


नई रणनीतियों का प्रभाव

जब कंपनियां नई व्यावसायिक रणनीतियाँ बनाती हैं, तो वे यह तय करती हैं कि किन भूमिकाओं की भविष्य में आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे विभाग, विशेषकर सपोर्ट फंक्शन, जहां ऑटोमेशन संभव है, सबसे पहले प्रभावित होते हैं। इससे कभी-कभी अच्छे प्रदर्शन वाले कर्मचारी भी जोखिम में आ जाते हैं।


प्रमोशन में देरी का असर

जिन कर्मचारियों को लंबे समय से प्रमोशन नहीं मिला है, उनके लिए जोखिम बढ़ जाता है। प्रबंधन अक्सर ऐसे कर्मचारियों को यह समझता है कि वे कंपनी की भविष्य की दिशा में ज्यादा योगदान नहीं दे पाएंगे। ऐसे में संगठन लागत बचाने के लिए इन्हें प्राथमिकता से चुन सकता है।