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गुजरात विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विभाग के प्रमुख की नियुक्ति पर विवाद

हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय ने एक रसायन विज्ञान के प्रोफेसर को अंग्रेजी विभाग का प्रमुख नियुक्त किया है, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ है। इस निर्णय के खिलाफ एक अदालत में मामला दायर किया गया है, जिसमें विश्वविद्यालय की प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। क्या यह नियुक्ति उचित है? जानें पूरी कहानी में।
 

विवादास्पद नियुक्ति



हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय ने एक विवादास्पद निर्णय लिया है, जिसमें एक रसायन विज्ञान के प्रोफेसर को अंग्रेजी विभाग का प्रमुख नियुक्त किया गया है।


यह निर्णय न केवल विश्वविद्यालय के भीतर असंतोष का कारण बना, बल्कि इसके खिलाफ एक अदालत में मामला भी दायर किया गया, जहां प्रशासन से कड़े सवाल पूछे गए।


मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला तब शुरू हुआ जब अंग्रेजी विभाग के प्रमुख, आदेश पाल, जून 2025 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद, विश्वविद्यालय ने रसायन विज्ञान विभाग की संकाय सदस्य, कोकिलाबेन परमार को अंग्रेजी विभाग का प्रमुख नियुक्त किया।


अंग्रेजी विभाग की एक अन्य संकाय सदस्य, हेतल पटेल, ने इस निर्णय से असहमति जताई और शिक्षा न्यायाधिकरण के समक्ष इस नियुक्ति को चुनौती दी।


विश्वविद्यालय का तर्क

कोर्ट में विश्वविद्यालय के वकील, मीट शाह ने तर्क किया कि अंग्रेजी विभाग में संकाय की वरिष्ठता अभी तय नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि कोकिलाबेन परमार को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां दी गई हैं, न कि शैक्षणिक निर्णय लेने की भूमिका।


विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि यह एक सेवा मामला नहीं है, बल्कि एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है, इसलिए न्यायाधिकरण को इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है।


न्यायाधिकरण और उच्च न्यायालय की भूमिका

10 अक्टूबर 2025 को, शिक्षा न्यायाधिकरण ने विश्वविद्यालय के निर्णय पर रोक लगा दी। इसके बाद, कोकिलाबेन परमार ने उच्च न्यायालय का रुख किया, यह कहते हुए कि न्यायाधिकरण ने उनकी बात सुने बिना ही रोक आदेश जारी किया।


एक सप्ताह बाद, उच्च न्यायालय ने न्यायाधिकरण के आदेश पर रोक लगा दी। इस बीच, विश्वविद्यालय ने भी न्यायाधिकरण के निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी।


कोर्ट के सवाल

इस मामले की सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति निरजार देसाई ने सीधे विश्वविद्यालय से सवाल किया कि एक रसायन विज्ञान के प्रोफेसर अंग्रेजी साहित्य के छात्रों की शैक्षणिक समस्याओं को कैसे समझ सकते हैं।


विश्वविद्यालय इस सवाल का ठोस उत्तर नहीं दे सका और केवल यह कहा कि कार्यकारी एचओडी की भूमिका प्रशासनिक कार्यों तक सीमित है।


कोर्ट ने यह भी पूछा कि बिना विषय ज्ञान के एचओडी छात्रों की मदद कैसे कर सकता है। इसके बाद, विश्वविद्यालय ने कोर्ट में एक मसौदा आदेश पेश किया, जिसमें प्रस्तावित किया गया कि अंग्रेजी विभाग के एक संकाय सदस्य को कोकिलाबेन परमार के स्थान पर कार्यकारी एचओडी नियुक्त किया जाए।


आगे की कार्रवाई

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के रोक आदेश के कारण वह तुरंत बदलाव नहीं कर सकता। इसके अलावा, हेतल पटेल ने प्रस्तावित संकाय सदस्य के नाम पर आपत्ति जताई और नियुक्ति के संबंध में वरिष्ठता नियमों का हवाला दिया।


इसके बाद, कोकिलाबेन परमार और विश्वविद्यालय ने अपनी-अपनी याचिकाएं वापस ले लीं। उच्च न्यायालय ने हेतल पटेल की आपत्ति का समाधान करते हुए कहा कि वह नए नियुक्ति को कानून के अनुसार उचित प्राधिकरण के समक्ष चुनौती दे सकती हैं।