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गंगा सिंह राजपुरोहित: हिंदी माध्यम से आईएएस बनने की प्रेरणादायक कहानी

गंगा सिंह राजपुरोहित की कहानी एक प्रेरणा है, जो हिंदी माध्यम से पढ़ाई करते हुए यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर गुजरात के सबसे युवा जिला कलेक्टर बने। उनका सफर राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ और उन्होंने अपनी मेहनत और सही रणनीति से यह उपलब्धि हासिल की। गंगा की सफलता यह दर्शाती है कि भाषा कभी भी बाधा नहीं बनती, और यह कहानी लाखों युवाओं को प्रेरित कर रही है।
 

गंगा सिंह राजपुरोहित की सफलता की कहानी


गंगा सिंह राजपुरोहित की सफलता: जब लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में कोई कमी न हो, तो साधारण परिस्थितियां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनतीं। राजस्थान के एक छोटे से गांव से निकलकर आईएएस अधिकारी बने गंगा सिंह ने इस सिद्धांत को सच साबित किया है। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले गंगा ने यूपीएससी परीक्षा में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त की और गुजरात के सबसे युवा जिला कलेक्टर बनने का गौरव हासिल किया है। हाल ही में, उन्होंने नर्मदा जिले के जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यभार संभाला है। यह उनके प्रशासनिक करियर की पहली जिला कलेक्टर की पोस्टिंग है। उनकी यह उपलब्धि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।


सीमा के निकट छोटे गांव से शुरू हुआ सफर

गंगा सिंह राजपुरोहित का जन्म 5 मई 1994 को राजस्थान के बालोतरा जिले के डंडाली गांव में हुआ। यह गांव भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित है और इसकी आबादी लगभग दो हजार है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से प्राप्त की। पढ़ाई में हमेशा अव्‍वल रहने वाले गंगा ने दसवीं कक्षा में 76 प्रतिशत अंक प्राप्त कर स्कूल में पहला स्थान हासिल किया।


दादाजी की सलाह पर हिंदी माध्यम चुना

स्कूल के बाद, गंगा ने जालोर से विज्ञान में स्नातक (बीएससी) की डिग्री प्राप्त की। सिविल सेवा की तैयारी के दौरान, उन्होंने अपने दादाजी की प्रेरणा से हिंदी माध्यम को चुना। इसके अलावा, यूपीएससी मुख्य परीक्षा में उन्होंने हिंदी साहित्य को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना। उनका यह निर्णय आगे चलकर उनकी सफलता की मजबूत नींव बना।


दूसरे प्रयास में हासिल की AIR 33

गंगा सिंह ने 2016 की यूपीएससी परीक्षा अपने दूसरे प्रयास में पास की। उन्होंने पूरे देश में ऑल इंडिया रैंक 33 प्राप्त की और महज 23 वर्ष की आयु में 2017 बैच के आईएएस अधिकारी बन गए। उनकी यह उपलब्धि हिंदी माध्यम से तैयारी करने वाले छात्रों के लिए प्रेरणादायक मानी जाती है।


जिला कलेक्टर की पहली जिम्मेदारी

नर्मदा जिले के जिला कलेक्टर के रूप में यह उनकी पहली नियुक्ति है। इससे पहले, वे वडोदरा नगर निगम में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे। गुजरात कैडर के 2017 बैच के आईएएस अधिकारियों में वे सबसे कम उम्र के जिला कलेक्टर हैं। यह उपलब्धि उनके प्रशासनिक करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ है।


हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए प्रेरणा

गंगा सिंह राजपुरोहित की सफलता यह दर्शाती है कि सिविल सेवा परीक्षा में भाषा कभी भी बाधा नहीं बनती। सही रणनीति, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के साथ, कोई भी उम्मीदवार अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। आज उनकी कहानी उन लाखों युवाओं को प्रेरित कर रही है, जो हिंदी माध्यम से यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं और बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।