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अथिरा सुरेश: एक प्रेरणादायक कहानी जो नौकरी छोड़कर सेना में गईं

केरल की अथिरा सुरेश की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो एक अच्छी नौकरी के बावजूद अपने बड़े सपनों को नहीं छोड़ते। JEE पास करने के बाद, उन्होंने NIT कालीकट से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और एक्सॉनमोबिल जैसी कंपनी में नौकरी की। लेकिन, सेना में जाने का सपना उन्हें हमेशा प्रेरित करता रहा। जानें कैसे उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर भारतीय सेना में शामिल होने का निर्णय लिया और पहले प्रयास में सफलता प्राप्त की।
 

एक प्रेरणादायक यात्रा


केरल की अथिरा सुरेश की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो एक अच्छी नौकरी के बावजूद अपने बड़े सपनों को नहीं छोड़ते। JEE परीक्षा पास करने के बाद, उन्होंने NIT कालीकट से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद, उन्हें एक्सॉनमोबिल जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी मिली और बेंगलुरु में कॉर्पोरेट करियर की शुरुआत की। लेकिन, उनके पिता की सेना की वर्दी देखकर, देशसेवा का सपना उनके मन में हमेशा जीवित रहा। अंततः, उन्होंने अपनी अच्छी नौकरी छोड़कर भारतीय सेना में शामिल होने का निर्णय लिया।


NIT कालीकट में पढ़ाई और जिम्मेदारियों का निर्वहन

अथिरा ने NIT कालीकट में पढ़ाई के दौरान केवल अकादमिक पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि उन्होंने नेवल NCC में भाग लिया और लिटरेरी व डिबेटिंग क्लब से भी जुड़ीं। वह एथलेटिक्स टीम की उप-कप्तान और डिप्टी स्पोर्ट्स सेक्रेटरी के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं। पढ़ाई के बाद, उन्होंने L&T में इंटर्नशिप की और फिर एक्सॉनमोबिल में प्रोजेक्ट इंजीनियर के रूप में करियर की शुरुआत की।


लाखों की नौकरी के बावजूद सेना की तैयारी

बेंगलुरु जैसे शहर में अच्छी नौकरी मिलने के बावजूद, अथिरा ने सेना में जाने का सपना नहीं छोड़ा। उन्होंने नौकरी के साथ-साथ सैन्य सेवा की तैयारी जारी रखी। उनकी मेहनत का फल यह रहा कि उनका चयन ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), गया के लिए हो गया। इसके बाद, उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण लेकर अपने सपने को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया।


परिवार का सैन्य इतिहास

अथिरा के सेना में जाने के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा योगदान है। उनके पिता, नायक सुरेश, भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स से सेवानिवृत्त हुए हैं और अब रेलवे सुरक्षा बल में कार्यरत हैं। उनके दादा गंगाधरन नायर और नाना स्व. वेलायुधन नायर भी सेना में रह चुके हैं। बचपन से सैन्य माहौल देखने के कारण, अथिरा के मन में भी वर्दी पहनने का सपना मजबूत हुआ।


पहले प्रयास में सफलता

अथिरा ने पहले ही प्रयास में SSB पास किया। OTA में अनुशासित प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, पासिंग आउट परेड में उन्हें लेफ्टिनेंट के रैंक से नवाजा गया। इस क्षण पर उनके माता-पिता, पिता सुरेश और मां सुमा, बेहद भावुक हो गए। उनके साथ 252 अन्य कैडेट भी शॉर्ट सर्विस कमीशन (टेक्निकल) के तहत सेना में शामिल हुए। सिविल इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि के कारण, उन्हें टेक्निकल आर्म में सेवा देने की उम्मीद है।