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UGC-NET परीक्षा: NTA की जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण बदलाव

UGC-NET परीक्षा, जो जूनियर रिसर्च फेलोशिप और सहायक प्रोफेसर पदों के लिए पात्रता निर्धारित करती है, का संचालन पहले CBSE द्वारा किया जाता था। 2018 में, NTA ने इसकी जिम्मेदारी संभाली और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रारूप को लागू किया। इस लेख में, हम UGC-NET परीक्षा के महत्व, NTA की भूमिका और परीक्षा प्रक्रिया में हुए बदलावों पर चर्चा करेंगे।
 

UGC-NET परीक्षा का महत्व


UGC-NET देश की प्रमुख पात्रता परीक्षाओं में से एक है। यह परीक्षा उम्मीदवारों की जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF), सहायक प्रोफेसर पदों और पीएचडी कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए पात्रता निर्धारित करती है। पहले इस परीक्षा का आयोजन CBSE द्वारा किया जाता था, लेकिन 2018 में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ जब इसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को सौंप दी गई।


NTA की जिम्मेदारी कब शुरू हुई?

NTA की स्थापना के बाद, 2018 में कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का आयोजन करने के लिए एक प्रणाली बनाई गई, जिसमें UGC-NET भी शामिल है। NTA ने दिसंबर 2018 से UGC-NET का आयोजन करना शुरू किया। NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर भी यह स्पष्ट किया गया है कि एजेंसी ने दिसंबर 2018 से UGC-NET परीक्षा का संचालन किया है।


NTA द्वारा पहली बार UGC-NET का आयोजन

NTA द्वारा आयोजित पहली UGC-NET परीक्षा 18 से 22 दिसंबर 2018 के बीच हुई थी। इस परीक्षा के लिए लगभग 9.57 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था। यह परीक्षा 85 विषयों में आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर में 598 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे।


2018 में CBT प्रारूप का परिचय

दिसंबर 2018 की परीक्षा UGC-NET के इतिहास में विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसमें कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रारूप का परिचय दिया गया। NTA ने स्पष्ट रूप से घोषणा की थी कि दिसंबर 2018 UGC-NET परीक्षा पहली बार कंप्यूटर आधारित परीक्षा मोड में आयोजित की जाएगी। तब से, UGC-NET का आयोजन इसी विधि से किया जा रहा है।


परिवर्तन का कारण

CBT लागू करने का एक प्रमुख उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक संगठित, पारदर्शी और सुरक्षित बनाना था। NTA ने अपनी पहली UGC-NET परीक्षा के लिए सीसीटीवी निगरानी, जैमर और परीक्षा केंद्रों की निगरानी जैसे उपाय भी लागू किए थे।