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NCERT: भारतीय शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका

NCERT, जो 1961 में स्थापित हुआ, ने भारतीय स्कूल शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह संगठन न केवल CBSE बोर्ड के छात्रों के लिए पाठ्यपुस्तकें तैयार करता है, बल्कि UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी आवश्यक सामग्री प्रदान करता है। NCERT की स्थापना, कोठारी आयोग की सिफारिशें, और पाठ्यक्रम में समय-समय पर बदलावों के बारे में जानें। यह लेख NCERT की यात्रा और इसके महत्व को उजागर करता है।
 

NCERT का परिचय



1961 में स्थापित, NCERT ने पिछले छह दशकों में भारत की स्कूल शिक्षा प्रणाली को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आइए इसके विवरण पर एक नज़र डालते हैं।


NCERT का महत्व

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) देश की स्कूल शिक्षा प्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। आज, देशभर में लाखों छात्र—विशेषकर CBSE बोर्ड के अंतर्गत—NCERT की किताबों का अध्ययन करते हैं। ये किताबें UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी एक बुनियादी संसाधन के रूप में कार्य करती हैं।


NCERT की स्थापना

NCERT की स्थापना 1 सितंबर, 1961 को शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देशभर में स्कूल शिक्षा के लिए समान, उच्च गुणवत्ता मानकों का विकास करना था। इसके अतिरिक्त, इसे केंद्रीय और राज्य सरकारों को शिक्षा पर नीति सलाह देने और छात्रों के लिए मॉडल पाठ्यपुस्तकें बनाने का कार्य सौंपा गया।


संस्थाओं का विलय

NCERT का गठन सात प्रमुख सरकारी संस्थानों के विलय से हुआ। इनमें केंद्रीय शिक्षा संस्थान, केंद्रीय पाठ्यपुस्तक अनुसंधान ब्यूरो, और राष्ट्रीय मूलभूत शिक्षा संस्थान शामिल थे। इन संस्थाओं के एकीकरण का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम विकास को एक ही मंच पर लाना था।


कोठारी आयोग की भूमिका

1964 में गठित कोठारी आयोग ने NCERT के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोग ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की सिफारिश की और राष्ट्रीय स्तर पर एक समान पाठ्यक्रम और उच्च गुणवत्ता की शैक्षिक सामग्री विकसित करने के लिए एक रोडमैप प्रदान किया। इसके बाद, NCERT ने देश की बदलती जरूरतों के अनुसार शैक्षिक ढांचे को मजबूत करने के लिए काम करना शुरू किया।


1975 में महत्वपूर्ण बदलाव

1975 में, राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार "दस वर्षीय स्कूल पाठ्यक्रम" पेश किया गया। इसका उद्देश्य शिक्षा को भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक वास्तविकताओं के साथ संरेखित करना था। इसके बाद, 1988 में, पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) के अनुसार संशोधित किया गया, जिसमें छात्र-केंद्रित शिक्षा पर जोर दिया गया और बच्चों पर शैक्षणिक बोझ को कम किया गया।


लगातार बदलाव

हाल के वर्षों में, NCERT ने पाठ्यक्रम को लगातार संशोधित किया है। 2023 में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार एक नई समिति का गठन किया गया, जिसमें लेखक सुधा मूर्ति और प्रसिद्ध संगीतकार शंकर महादेवन जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल हैं। यह समिति वर्तमान में कक्षाओं 3 से 12 के लिए नए पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों को अंतिम रूप दे रही है।


NCERT की किताबों का महत्व

आज, NCERT की किताबें CBSE स्कूलों के लिए प्राथमिक अध्ययन सामग्री के रूप में कार्य करती हैं। इसके अलावा, कई राज्य शिक्षा बोर्ड अपनी पाठ्यक्रमों को इन किताबों के आधार पर बनाते हैं। NCERT की किताबें UPSC, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी आवश्यक अध्ययन सामग्री मानी जाती हैं।