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संसद में पेश हुआ एंटी-पेपर लीक बिल, छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान

सरकार ने पेपर लीक की समस्या से निपटने के लिए संसद में 'एंटी-पेपर लीक बिल' पेश किया है। इस बिल में कड़े प्रावधानों के साथ फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना का प्रस्ताव है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस बिल को पेश करते हुए छात्रों के भविष्य की सुरक्षा की बात की। नए कानून में सज़ा और जुर्माने की राशि को बढ़ाया गया है। PM मोदी ने युवाओं के साथ संवाद करते हुए इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया है। जानें इस बिल के प्रमुख बिंदु और सरकार के उठाए गए कदम।
 

पेपर लीक के खिलाफ नया कानून



पेपर लीक की समस्या अब सड़कों से संसद तक पहुँच चुकी है। इस मुद्दे पर काबू पाने के लिए सरकार ने 'एंटी-पेपर लीक बिल' को संसद में पेश किया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह बिल लोकसभा में प्रस्तुत किया। हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद, सरकार ने पेपर लीक से निपटने के लिए यह सख्त कानून लाने का निर्णय लिया है। मोदी सरकार का उद्देश्य परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को रोकना है।


इस नए कानून के अंतर्गत, हर राज्य में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। ये कोर्ट प्रतिदिन सुनवाई करेंगे और 90 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा कर सजा सुनाएंगे।


संसदीय कार्य मंत्री की अपील

किरन रिजिजू, संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, "अब इस मुद्दे पर कोई ध्यान भटकाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। मैं कांग्रेस और विपक्ष से अनुरोध करता हूँ कि वे छात्रों के भविष्य के लिए सरकार द्वारा लाए गए सुधारों पर चर्चा करें। यह राजनीति का समय नहीं है। छात्रों के हित में यह बिल पास किया जाएगा।"


कानून में बदलाव

नए संशोधन बिल में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:


1. **सज़ा**: पहले 3 से 5 साल की सज़ा का प्रावधान था, जिसे अब 5 से 10 साल कर दिया गया है।


2. **जुर्माना**: पेपर लीक के लिए जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया गया है।


3. **जाँच एजेंसी**: पुराने कानून के तहत एक केंद्रीय जाँच एजेंसी थी, जबकि नए बिल में स्पेशल टास्क फोर्स का गठन अनिवार्य किया गया है।


4. **जाँच की समय सीमा**: नए संशोधन में जाँच को दो महीने के भीतर पूरा करने का प्रावधान है।


5. **सुनवाई**: पेपर लीक मामलों की सुनवाई अब फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी।


6. **फैसला सुनाने की समय सीमा**: संशोधन में तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का प्रावधान है।


7. **हाई कोर्ट में अपील**: अब अपील 30 दिनों के भीतर की जा सकती है।


PM मोदी का युवाओं से संवाद

PM मोदी ने पेपर लीक के मुद्दे पर युवाओं के साथ लगातार संवाद किया है। उन्होंने 23 जुलाई को एक वीडियो में नए कानून की घोषणा की और 24 जुलाई को 'जेन Z' को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। 26 जुलाई को उन्होंने एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने की बात कही।


इस टास्क फोर्स का नेतृत्व नंदन नीलेकणि करेंगे, जो सरकार को पेपर लीक रोकने और परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के सुझाव देंगे।


शिक्षा मंत्रालय में बदलाव

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, PM मोदी ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपा। यह बदलाव तब हुआ जब भारत की शिक्षा प्रणाली में बड़े सुधार हो रहे हैं। प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वह PM मोदी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।


सरकार के उठाए गए कदम

सरकार ने पेपर लीक के मुद्दे पर सख्त कार्रवाई करते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा, बर्खास्त अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जाएंगे।


दिल्ली पुलिस ने देश की प्रमुख परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है।