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भारत में उच्च शिक्षा पर गंभीर प्रतिबंध: Scholars at Risk की नई रिपोर्ट

Scholars at Risk की नई रिपोर्ट में भारत को 'Severely Restricted' श्रेणी में रखा गया है, जहां उच्च शिक्षा पर गंभीर प्रतिबंध हैं। रिपोर्ट में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, छात्रों और शिक्षकों की अभिव्यक्ति पर सरकारी हस्तक्षेप के मामलों का उल्लेख किया गया है। 59 देशों में उच्च शिक्षा पर हुए 382 हमलों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें भारत की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। रिपोर्ट में UGC की भूमिका और छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की गई है।
 

भारत में उच्च शिक्षा की स्थिति


भारत में उच्च शिक्षा और शैक्षणिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर Scholars at Risk द्वारा जारी की गई नई रिपोर्ट ने चिंता जताई है। इस रिपोर्ट में भारत को उन देशों की श्रेणी में रखा गया है, जहां शैक्षणिक स्वतंत्रता पर गंभीर प्रतिबंध हैं।
59 देशों में उच्च शिक्षा पर हमलों का विश्लेषण
Scholars at Risk की 2026 रिपोर्ट में 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 के बीच 59 देशों में उच्च शिक्षा समुदायों पर 382 हमलों का विवरण दिया गया है।
रिपोर्ट में छात्रों और शिक्षकों की अभिव्यक्ति पर कार्रवाई, विरोध प्रदर्शनों पर दबाव और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप जैसी घटनाओं का उल्लेख किया गया है।
भारत की स्थिति
रिपोर्ट में भारत को 'Severely Restricted' श्रेणी में रखा गया है। Scholars at Risk के अनुसार, भारत में उच्च शिक्षा में सरकारी हस्तक्षेप और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से संबंधित मुद्दे चिंता का विषय हैं।
रिपोर्ट में विश्वविद्यालय प्रशासन, नेतृत्व की नियुक्तियों और अकादमिक प्राथमिकताओं पर बाहरी प्रभाव का भी उल्लेख किया गया है।


Academic Freedom Index में गिरावट

Academic Freedom Index (AFI) के आंकड़े
रिपोर्ट में Academic Freedom Index (AFI) 2026 के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है, जो विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शैक्षणिक स्वतंत्रता का आकलन करता है।
भारत में संस्थागत स्वायत्तता और अकादमिक स्वतंत्रता में बदलावों को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।
UGC की भूमिका
रिपोर्ट में University Grants Commission (UGC) की भूमिका और उससे जुड़ी नीतियों पर भी चर्चा की गई है। Scholars at Risk ने कुछ नीतिगत बदलावों को विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और सरकारी प्रभाव के संदर्भ में देखा है।


छात्रों और शिक्षकों से जुड़े मामले

छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
Free to Think 2026 में भारत से जुड़े कई मामलों को अकादमिक स्वतंत्रता के संदर्भ में दर्ज किया गया है। इनमें छात्रों के प्रदर्शन और शिक्षकों से जुड़े विवाद शामिल हैं।
उदाहरण के लिए, IIT Gandhinagar के अतिथि प्रोफेसर Michel Danino के मामले का उल्लेख किया गया है, जो एक पाठ्यपुस्तक अध्याय से जुड़ा था।
रिपोर्ट में राजस्थान विश्वविद्यालय में 2025 के छात्र प्रदर्शनों का भी उल्लेख है, जहां छात्रों ने चुनाव बहाल करने की मांग की थी।


कैंपस प्रदर्शनों पर नजर

छात्र प्रदर्शन के मुद्दे
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में छात्र प्रदर्शन कई मुद्दों से जुड़े रहे हैं, जैसे राष्ट्रीय पहचान, जाति, धर्म, और नीतिगत बदलाव।
Scholars at Risk का कहना है कि कुछ मामलों में प्रदर्शनकारियों पर प्रशासन या पुलिस की कार्रवाई ने अकादमिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार को लेकर सवाल खड़े किए हैं।


वैश्विक स्तर पर अकादमिक स्वतंत्रता

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
यह रिपोर्ट केवल भारत तक सीमित नहीं है। Scholars at Risk ने अमेरिका समेत कई देशों में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और अकादमिक स्वतंत्रता पर दबाव का उल्लेख किया है।
रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह है कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शिक्षकों-छात्रों की स्वतंत्र अकादमिक अभिव्यक्ति को बनाए रखना उच्च शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।