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GST सुधार 2025: स्कूल की फीस और स्टेशनरी पर टैक्स में कमी

सरकार ने GST सुधार 2025 के तहत स्टेशनरी, किताबों और स्कूल की फीस को टैक्स मुक्त कर दिया है, जिससे अध्ययन की लागत में कमी आएगी। नए नियमों के अनुसार, बच्चों की स्टेशनरी जैसे पेंसिल, कॉपी और किताबें अब सस्ती होंगी। यह निर्णय विशेष रूप से छोटे बच्चों के माता-पिता के लिए फायदेमंद है। नए दरें 22 सितंबर से लागू होंगी, जिससे खरीदारी करना आसान होगा। जानें इस बदलाव का आम आदमी पर क्या प्रभाव पड़ेगा और शिक्षा की लागत में कैसे राहत मिलेगी।
 

GST सुधार 2025



सरकार ने नए GST दरों को लागू करके स्टेशनरी, किताबों और स्कूल की फीस को टैक्स मुक्त कर दिया है, जिससे अध्ययन की लागत में कमी आएगी।


क्या स्कूल की फीस में कमी आएगी?

नए GST दरों के बाद, अध्ययन की लागत में महत्वपूर्ण राहत मिलेगी। केंद्रीय सरकार द्वारा हाल ही में किए गए GST सुधारों के तहत, बच्चों की स्टेशनरी जैसे कॉपी, किताबें, पेंसिल, शार्पनर और इरेज़र अब बहुत सस्ती हो जाएंगी, क्योंकि इन पर टैक्स पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।


अब स्कूल की कॉपी, नोटबुक, व्यायाम पुस्तक, ग्राफ पुस्तक, प्रयोगशाला नोटबुक, किताबें, स्लेट, चाक, ब्लैकबोर्ड और अन्य स्टेशनरी सामान खरीदने पर कोई GST नहीं देना होगा। पहले इन चीजों पर 12% तक का टैक्स लगता था, जिससे उनकी कीमत बढ़ जाती थी। अब कीमतों में कमी के साथ, बच्चों की पढ़ाई की लागत भी घटेगी। यह निर्णय छोटे बच्चों के माता-पिता के लिए सबसे फायदेमंद है, क्योंकि पेंसिल, शार्पनर, इरेज़र जैसी चीजें हर महीने खरीदनी पड़ती हैं।


कितनी चीजों पर टैक्स समाप्त किया गया?

पेंसिल, शार्पनर, क्रेयॉन, पास्टल, इरेज़र, मानचित्र, चार्ट, ग्लोब, नोटबुक, प्रैक्टिस बुक्स, ड्राइंग बुक्स, समाचार पत्र, पत्रिकाएं, बच्चों के रंग, स्लेट, चाक, ब्लैकबोर्ड। ये सभी चीजें पहले 12% या 5% GST के दायरे में आती थीं, जो अब शून्य हो गई हैं।


क्या स्कूल फीस में भी बदलाव होगा?

इस नए बदलाव के साथ, सरकारी स्कूल, कॉलेज की शिक्षा, परीक्षा शुल्क, कोचिंग और छात्रवृत्ति सेवाएं पहले से ही टैक्स के दायरे से बाहर थीं। यानी शिक्षा की लागत सीधे कम होगी, स्कूल फीस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। हालांकि, यदि कोई पेशेवर पाठ्यक्रम या ऑनलाइन कोचिंग लेता है, तो उस पर 18% टैक्स अभी भी लागू होगा।


आम आदमी को राहत

नए दरों के बाद खरीदारी भी सस्ती हो जाएगी। यदि पहले एक ग्लोब 500 रुपये में 12% टैक्स के साथ मिलता था, तो अब यह लगभग 446 रुपये में बिना टैक्स के मिलेगा। माता-पिता अब अपने बच्चों की स्कूल खर्चों में सीधे लाभ प्राप्त करेंगे। गरीब वर्ग के बच्चों के लिए किताबें और कॉपियां खरीदना आसान होगा क्योंकि उनकी कीमतें घटेंगी।


कौन से दरें लागू की गईं?

पहले देश में चार टैक्स स्लैब थे: 5%, 12%, 18% और 28%। अब सरकार ने इसे केवल दो दरों - 5% और 18% में बदल दिया है। 12% और 28% स्लैब को समाप्त कर दिया गया है। इससे रोजमर्रा की चीजों, स्कूल की स्टेशनरी और घरेलू सामान पर टैक्स में राहत मिलेगी।


नए दरें कब लागू होंगी?

सरकार ने घोषणा की है कि ये नए दरें 22 सितंबर से लागू होंगी। इसलिए अगले महीने से, यदि कोई स्टेशनरी सामान खरीदता है, तो उसे टैक्स नहीं देना होगा, जिससे खरीदारी करना आसान होगा।


स्टेशनरी सस्ती होना क्यों आवश्यक है?

अध्ययन सामग्री पर टैक्स समाप्त होने से सभी के लिए पढ़ाई करना आसान हो जाएगा। गरीब बच्चों को किताबें, नोटबुक, पेंसिल आदि खरीदने में अब कोई समस्या नहीं होगी। इससे पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी और माता-पिता का बजट भी बेहतर होगा।