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UP बोर्ड ने 2026 की परीक्षा के लिए छात्रों के विवरण में त्रुटियों को सुधारने का अंतिम अवसर दिया

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 2026 की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में शामिल छात्रों के लिए त्रुटियों को सुधारने का अंतिम अवसर प्रदान किया है। सभी प्रकार की त्रुटियों को 10 अप्रैल 2026 तक ठीक करना अनिवार्य है। बोर्ड ने स्कूलों को निर्देशित किया है कि वे छात्रों के विवरण की जांच करें और सही जानकारी संबंधित कार्यालयों में जमा करें। इस प्रक्रिया में लापरवाही के लिए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
 

UP बोर्ड द्वारा त्रुटियों का सुधार करने की अंतिम तिथि



उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (UP बोर्ड) ने 2026 की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों को उनके शैक्षणिक विवरण में त्रुटियों को सुधारने का एक अंतिम अवसर प्रदान किया है। बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी प्रकार की त्रुटियों को बिना किसी अपवाद के 10 अप्रैल 2026 तक ठीक किया जाना चाहिए।


त्रुटियों की पहचान और सुधार की प्रक्रिया

बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि उम्मीदवारों के नाम, माता-पिता के नाम, विषय चयन और लिंग कोड में सुधार के लिए पहले भी दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद, कई छात्रों के विवरण में त्रुटियाँ पाई जा रही हैं, जो चिंता का विषय है।


विशेष रूप से, कई छात्रों के रिकॉर्ड में नामों के गलत हिंदी ट्रांसलिटरेशन के कारण विसंगतियाँ सामने आई हैं। यदि समय पर सुधार नहीं किया गया, तो छात्रों को भविष्य में उनके प्रमाण पत्रों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।


त्रुटियों का सुधार 10 अप्रैल तक अनिवार्य

UP बोर्ड ने सभी जिलों के स्कूलों के प्रिंसिपलों को निर्देशित किया है कि वे अपने संस्थानों में प्रत्येक छात्र के विवरण की पूरी तरह से जांच करें। उन्हें 10 अप्रैल 2026 तक पाई गई त्रुटियों को सुधारने और सही विवरण संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों में जमा करने का आदेश दिया गया है।


स्कूलों को सत्यापन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता

इसके अलावा, प्रत्येक स्कूल को एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें यह पुष्टि की जाएगी कि उनके जिले में 2026 की परीक्षाओं में शामिल सभी छात्रों के विवरण अब पूरी तरह से त्रुटियों से मुक्त हैं। बोर्ड ने इस कार्य को गंभीरता से लेने की आवश्यकता पर जोर दिया है और चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निर्धारित समय सीमा के भीतर इस कार्य को पूरा नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रशासन के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।