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एनसीईआरटी ने ऑपरेशन सिंदूर को पाठ्यक्रम में शामिल किया

एनसीईआरटी ने कक्षा 3 से 12 के छात्रों के लिए ऑपरेशन सिंदूर पर एक नया मॉड्यूल पेश किया है। यह मॉड्यूल न केवल सैन्य कार्रवाई का विवरण देता है, बल्कि शांति की रक्षा और शहीदों के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है। इसमें पाकिस्तान की नापाक गतिविधियों और स्थानीय लोगों की भूमिका पर भी चर्चा की गई है। जानें इस मॉड्यूल में और क्या खास है।
 

एनसीईआरटी का नया मॉड्यूल


एनसीईआरटी ने अपनी पाठ्यपुस्तकों में सामग्री को अपडेट करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को शामिल किया है। यह विशेष मॉड्यूल कक्षा 3 से 12 तक के छात्रों के लिए तैयार किया गया है। इसमें बताया गया है कि पहलगाम हमले का प्रतिशोध लेने के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी। यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि शांति की रक्षा और शहीदों को सम्मान देने का एक वादा है। ऑपरेशन सिंदूर का नाम उन मृतकों की विधवाओं को श्रद्धांजलि देने के लिए चुना गया है। इस मॉड्यूल में इसे एकजुटता, सहानुभूति और सम्मान का प्रतीक बताया गया है।


ऑपरेशन सिंदूर का विस्तृत विवरण

एनसीईआरटी के इस मॉड्यूल में ऑपरेशन सिंदूर के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। इसके साथ ही, पाकिस्तान द्वारा भारत में शांति भंग करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है। कक्षा 3 से इस विषय को पढ़ाना शुरू किया गया है, और आगे बढ़ती कक्षाओं में इसे और विस्तार से समझाया जाएगा।


पाकिस्तान की गतिविधियों का उल्लेख

इस मॉड्यूल में पाकिस्तान की नापाक गतिविधियों का भी जिक्र किया गया है। इसमें 2016 के उरी हमले और 2019 के पुलवामा हमले जैसे आतंकवादी घटनाओं का विवरण शामिल है। उरी और पुलवामा हमलों के सभी पहलुओं को संक्षेप में समझाया गया है।


स्थानीय लोगों की भूमिका

मॉड्यूल में आतंकवादी हमलों के दौरान स्थानीय लोगों की भूमिका पर भी चर्चा की गई है। इसमें बताया गया है कि कैसे स्थानीय लोगों ने आतंकवादियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन को भी मॉड्यूल में विशेष महत्व दिया गया है।