×

उत्तराखंड में नीट यूजी 2026 में फर्जी प्रमाण पत्रों की जांच का दायरा बढ़ा

उत्तराखंड में नीट यूजी 2026 के लिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के दौरान फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर, जांच का दायरा अब स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्रों से आगे बढ़कर अन्य आरक्षित वर्ग के प्रमाण पत्रों तक पहुंच गया है। एक सात सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) इस मामले की जांच कर रहा है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा की शिकायत के बाद यह मामला उजागर हुआ। SIT की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने प्रमाण पत्र फर्जी थे और कितने मामलों में कार्रवाई की जाएगी।
 

फर्जी प्रमाण पत्रों की जांच का मामला


उत्तराखंड में नीट यूजी 2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग के दौरान मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए प्रस्तुत किए गए कथित फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला अब और गंभीर हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर, जांच केवल स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्रों तक सीमित नहीं रहेगी। अब आरक्षित वर्ग के तहत दाखिले के लिए अन्य प्रमाण पत्रों की भी जांच की जाएगी।
प्रारंभिक जांच में 8 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में गड़बड़ी की बात सामने आई है। इन मामलों में संबंधित प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया गया है और दाखिले की प्रक्रिया भी रद्द कर दी गई है.


विशेष जांच दल (SIT) की गठन

7 सदस्यीय SIT कर रही जांच
इस मामले की जांच के लिए एक सात सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसकी अगुवाई एसपी ग्रामीण जया बालोनी कर रही हैं। SIT ने स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्रों से संबंधित मामलों की जांच शुरू कर दी है। इस दौरान संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है और विभिन्न सरकारी विभागों से रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं।
जांच में एक ऐसा मामला भी सामने आया है, जिसमें स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर वर्मा की पहचान का दुरुपयोग किया गया। जांच के अनुसार, धर्मवीर वर्मा का निधन हो चुका है और उनके परिवार को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके नाम का उपयोग मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए किया जा रहा है.


सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की जांच

सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी जांच में
SIT यह भी देख रही है कि क्या फर्जी प्रमाण पत्रों के निर्माण और उपयोग में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में इस पहलू से जुड़े कुछ संकेत मिले हैं। इसके साथ ही, प्रमाण पत्र जारी करने और सत्यापन की प्रक्रिया में शामिल सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। SIT यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दस्तावेजों की जांच में लापरवाही कैसे हुई और क्या जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई थी.


370 लोगों से जुड़े दस्तावेजों की शिकायत

करीब 370 लोगों से जुड़े दस्तावेज की शिकायत
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा की शिकायत के बाद सामने आया था। उन्होंने देहरादून के जिलाधिकारी को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उत्तराखंड से बाहर 10वीं और 12वीं की पढ़ाई करने वाले कुछ अभ्यर्थियों ने अंतिम समय में ऑनलाइन डोमिसाइल और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र प्राप्त किए।
8 सितंबर को चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने काउंसलिंग की चॉइस फिलिंग की समय सीमा को देखते हुए तत्काल मजिस्ट्रेट जांच की मांग की थी। इसके बाद 18 सितंबर को प्रदीप बहुगुणा ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात की और करीब 370 लोगों से जुड़े दस्तावेज सौंपे.


जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
अब जांच का फोकस केवल कुछ विशेष प्रमाण पत्रों तक सीमित नहीं रहेगा। आरक्षित वर्ग के तहत दाखिले में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों के सत्यापन से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि अनियमितता कितने मामलों तक फैली हुई है। SIT की रिपोर्ट और संबंधित विभागों के सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने प्रमाण पत्रों में वास्तविक गड़बड़ी थी और किन मामलों में अभ्यर्थियों के दाखिले पर कार्रवाई की जाएगी.