×

आईआईटी छात्रों के लिए नया क्रेडिट शेयरिंग सिस्टम: अध्ययन का अनुभव होगा और भी समृद्ध

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में अध्ययन कर रहे अंडर ग्रेजुएट छात्रों के लिए एक नई क्रेडिट शेयरिंग व्यवस्था लागू की जा रही है। इस योजना के तहत छात्र अपने मूल कैंपस के अलावा अन्य आईआईटी संस्थानों में भी पढ़ाई कर सकेंगे, जिससे उन्हें विभिन्न विषयों में विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर मिलेगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना की सिफारिश की गई है, जिसका उद्देश्य छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अनुभव प्रदान करना है। जानें इस योजना के अन्य लाभ और भविष्य की योजनाएँ।
 

नई शिक्षा व्यवस्था का आगाज़


नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के अंडर ग्रेजुएट छात्रों के लिए शैक्षणिक अनुभव को और भी समृद्ध बनाने की दिशा में एक नई पहल की जा रही है। केंद्र सरकार और आईआईटी काउंसिल एक ऐसी व्यवस्था लागू करने की योजना बना रही है, जिसके तहत छात्र अपने मूल आईआईटी कैंपस के अलावा अन्य आईआईटी संस्थानों में एक या दो सेमेस्टर की पढ़ाई कर सकेंगे। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि दूसरे कैंपस में किए गए कोर्स के 'क्रेडिट' उनके मूल संस्थान की डिग्री में जोड़े जाएंगे।


क्रांतिकारी बदलाव की सिफारिश

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में हुई आईआईटी काउंसिल की बैठक में इस महत्वपूर्ण बदलाव की सिफारिश की गई। काउंसिल का उद्देश्य है कि प्रारंभिक चरण में कम से कम 5 प्रतिशत अंडर ग्रेजुएट छात्रों को इस 'इंटर-आईआईटी एक्सचेंज' का लाभ मिले। इस योजना का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि क्रेडिट ट्रांसफर की प्रक्रिया बिना किसी तकनीकी बाधा के संपन्न हो सके। इस काउंसिल में देश के सभी आईआईटी के निदेशक और उनके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरपर्सन शामिल हैं, जो इस योजना को लागू करने के लिए साझा दस्तावेज तैयार कर रहे हैं।


विशेषज्ञता और इंटर्नशिप के नए अवसर

विशेषज्ञता और इंटर्नशिप के खुलेंगे द्वार 


आईआईटी मद्रास के डीन (एकेडमिक कोर्सेज) प्रोफेसर प्रताप हरिदौस के अनुसार, यह योजना छात्रों को उन विषयों (इलेक्टिव्स) को पढ़ने का अवसर प्रदान करेगी, जो उनके अपने कैंपस में उपलब्ध नहीं हैं। चूंकि हर संस्थान में हर विषय का विशेषज्ञ नहीं होता, इसलिए छात्र अपनी रुचि के अनुसार विशेषज्ञता वाले दूसरे आईआईटी का चयन कर सकेंगे।


भविष्य की योजनाएँ

भविष्य में एनआईटी और आईआईआईटी भी होंगे शामिल 


आईआईटी मद्रास के नेतृत्व में एक विशेष टीम ऐसा 'फ्लेक्सिबल क्रेडिट शेयरिंग फ्रेमवर्क' तैयार कर रही है, जिसे भविष्य में एनआईटी (NIT), आईआईआईटी (IIIT), आईएसईआर (IISER) और एनएलयू (NLU) जैसे गैर-आईआईटी संस्थानों तक भी विस्तारित किया जा सके। हालांकि, इस योजना के कार्यान्वयन में हॉस्टल क्षमता जैसी कुछ व्यावहारिक चुनौतियाँ आ सकती हैं, जिस पर संस्थान अपने सीनेट स्तर पर चर्चा कर रहे हैं। प्रोफेसर हरिदौस ने यह भी संकेत दिया कि एनआईटी के साथ चल रहे मौजूदा पीएचडी फीडर प्रोग्राम को भी इस नई व्यवस्था के साथ जोड़ा जा सकता है।