SGSITS Indore Introduces B.Tech in Hindi Medium for Civil Engineering
B.Tech in Hindi Medium Launched at SGSITS Indore
मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित श्री जीएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) ने हिंदी माध्यम में बी.टेक की पढ़ाई शुरू करने की घोषणा की है। यह कार्यक्रम 2026-27 शैक्षणिक सत्र से शुरू होगा और इसमें अंतिम वर्ष के छात्रों को ₹2 लाख का प्रोत्साहन दिया जाएगा।
यह पहल उन छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है जो हिंदी में पढ़ाई करना चाहते हैं। यह मध्य प्रदेश में अपनी तरह की पहली शुरुआत मानी जा रही है, जो उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो पहले अंग्रेजी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने में हिचकिचाते थे।
निर्णय का कारण
इंजीनियरिंग शिक्षा में अधिकांश तकनीकी शब्दावली अंग्रेजी में होती है, जिससे कई छात्रों को अवधारणाओं को समझने में कठिनाई होती है। यह भाषा की बाधा अक्सर उनकी पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव डालती है, जिसके कारण कुछ छात्र पाठ्यक्रम को बीच में ही छोड़ने का निर्णय लेते हैं। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए, संस्थान ने हिंदी माध्यम में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया।
छात्रों को प्रोत्साहन
यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा देने पर जोर देती है। इससे छात्रों को अपने भाषा में विषयों को बेहतर समझने में मदद मिलेगी। इसी दृष्टिकोण के तहत, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने 2021-22 शैक्षणिक वर्ष से हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा प्रदान करने की पहल की।
पिछली पहलों
AICTE के अनुसार, 2021-22 शैक्षणिक वर्ष में छह भाषाओं—हिंदी, मराठी, तेलुगु, कन्नड़ और तमिल—में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम शुरू करने वाले लगभग 20 संस्थान थे, जिसमें लगभग 255 छात्रों ने नामांकन कराया। इसके अलावा, AICTE ने 12 भारतीय भाषाओं में इंजीनियरिंग पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद करने की एक बड़ी परियोजना शुरू की है, ताकि छात्रों को अपनी भाषा में अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सके।
सिविल इंजीनियरिंग से शुरुआत
वर्तमान में, यह पाठ्यक्रम SGSITS के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में विशेष रूप से पेश किया गया है। यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो इसे भविष्य में यांत्रिकी, विद्युत और कंप्यूटर विज्ञान जैसे अन्य विषयों में भी विस्तारित किया जा सकता है। इससे मध्य प्रदेश के हजारों छात्रों को लाभ होगा, जो गांवों और छोटे शहरों से आते हैं और हिंदी माध्यम में अपनी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं।
सीटों की संख्या और छात्र नामांकन
कॉलेज ने इस विशेष बैच के लिए 30 सीटें निर्धारित की हैं। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 20 छात्रों ने पहले ही इस पाठ्यक्रम में नामांकन कराया है। हिंदी माध्यम में इंजीनियरिंग की पढ़ाई में रुचि रखने वाले छात्रों की संख्या इस पहल की सफलता को दर्शाती है।