सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: जूनियर इंजीनियर भर्ती में डिप्लोमा धारकों को मिली प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट, जूनियर इंजीनियर भर्ती 2026: सुप्रीम कोर्ट ने डिप्लोमा धारकों और बी.टेक डिग्री धारकों के बीच जूनियर इंजीनियर (JE) भर्ती को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद पर महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब भर्ती प्रक्रिया में डिप्लोमा को न्यूनतम योग्यता के रूप में रखा गया है, तो बी.टेक या अन्य इंजीनियरिंग डिग्री धारक अपने आप को स्वचालित रूप से योग्य नहीं मान सकते। ग्रेजुएट इंजीनियरिंग स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने डिप्लोमा इंजीनियर फेडरेशन के पक्ष में फैसला सुनाया। इस निर्णय के बाद, उत्तर प्रदेश में जूनियर इंजीनियर भर्ती प्रक्रिया के लिए मार्ग स्पष्ट हो गया है।
मामले का संक्षिप्त विवरण
मामला क्या था?
जून 2024 में, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने 4,612 जूनियर इंजीनियर पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया। इस भर्ती के लिए आवेदन करने के लिए इंजीनियरिंग डिप्लोमा को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के रूप में निर्धारित किया गया था। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद, कई बी.टेक और डिग्री धारक इंजीनियरों ने इस प्रावधान को चुनौती दी। उनका तर्क था कि इंजीनियरिंग डिग्री धारक डिप्लोमा धारकों की तुलना में अधिक योग्य हैं; इसलिए उन्हें भी आवेदन करने का अवसर मिलना चाहिए।
उच्च न्यायालय से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
मामले की सुनवाई
डिग्री धारक उम्मीदवारों ने लखनऊ बेंच, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी। डिप्लोमा इंजीनियर फेडरेशन भी मामले में पक्षकार बना और याचिका का विरोध किया। सुनवाई के बाद, 20 अप्रैल 2026 को, उच्च न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाया, जिसमें कहा गया कि डिग्री धारक इंजीनियरों को डिप्लोमा इंजीनियरों के समकक्ष नहीं माना जा सकता है, और भर्ती के लिए निर्धारित योग्यता में परिवर्तन नहीं किया जा सकता। इस निर्णय को चुनौती देते हुए, ग्रेजुएट इंजीनियरिंग स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय क्या था?
एक रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई की। विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए, कोर्ट ने उच्च न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा। इस निर्णय का सीधा प्रभाव यह है कि भर्ती अभियानों में जहां विभाग ने डिप्लोमा को न्यूनतम और आवश्यक योग्यता के रूप में निर्धारित किया है, वहां बी.टेक या अन्य उच्च डिग्री धारक केवल अपनी उच्च योग्यता के कारण पात्रता का दावा नहीं कर सकते।
डिप्लोमा इंजीनियर फेडरेशन का स्वागत
फेडरेशन का बयान
डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन के पीडब्ल्यूडी प्रांतीय अध्यक्ष पंडित द्विवेदी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भर्ती विज्ञापन के प्रारंभ से ही डिप्लोमा धारकों को पात्र माना गया था, और इसी आधार पर लाखों उम्मीदवारों ने आवेदन किया। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया के मध्य में पात्रता मानदंड को बदलना उचित नहीं होता। उन्होंने आगे कहा कि कोर्ट ने डिप्लोमा धारकों के अधिकारों की रक्षा की है और भर्ती नियमों की वैधता को बनाए रखा है।
भर्ती प्रक्रिया की स्थिति
परीक्षा पहले ही हो चुकी है
यह मामला केवल पात्रता के मुद्दे तक सीमित नहीं था; बल्कि भर्ती प्रक्रिया पहले ही काफी आगे बढ़ चुकी थी। जूनियर इंजीनियर भर्ती परीक्षा, जो उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की गई थी, मई 2026 में हुई थी। यदि पात्रता मानदंड में कोई परिवर्तन होता, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया खतरे में पड़ सकती थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद, चयन प्रक्रिया अब आगे बढ़ने के लिए स्पष्ट है।
भविष्य पर प्रभाव
भर्ती प्रक्रिया पर प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद, केवल वे उम्मीदवार जो 4,612 जूनियर इंजीनियर पदों के लिए डिप्लोमा योग्यता के आधार पर आवेदन कर चुके हैं, उन्हें ही पात्र माना जाएगा। यह निर्णय भर्ती प्रक्रिया में लंबे समय से चल रही कानूनी अनिश्चितता को समाप्त कर देता है, और चयन प्रक्रिया अब बिना किसी बाधा के आगे बढ़ने की उम्मीद है। यह निर्णय भविष्य की भर्तियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा, विशेष रूप से उन मामलों में जहां न्यूनतम योग्यता को लेकर विवाद उत्पन्न होता है।
